About Solar System in Hindi || सौरमंडल के बारे में || B.ed

Hindi Meaning of Solar System – सौरमंडल

सौरमंडल क्या है? (What is Solar System?)

मानव ने क्रमबद्ध इकाई के रूप में जिस विश्व की संकल्पना परिलक्षित की उसे ‘ब्रह्माण्ड‘ कहा गया। अंग्रेजी भाषा में ब्रह्माण्ड को कॉसमास (Cosmos) कहा जाता है, जिसका अर्थ होता है सुव्यवस्था। ब्रह्माण्ड से सम्बन्धित अध्ययन को ब्रह्माण्ड विज्ञान कहते हैं। कुछ विद्वान इन्हें आकाशीय पिण्ड भी कहते हैं। हमारी पृथ्वी भी एक खगोलीय पिण्ड है । कुछ आकाशीय पिण्ड काफी बड़े आकार वाले तथा गरम होते हैं। ये पिण्ड गैसों के बने होते हैं। तथा इनके पास अपनी ऊर्जा या प्रकाश होता है जिसे ये अधिक मात्रा मे उत्सर्जित करते हैं।  खगोलीय पिण्डों को तारा कहते हैं।   सूर्य भी एक तारा है। अन्य तारों की अपेक्षा सूर्य अत्यन्त निकट है जिसके कारण हमें यह बड़ा एवं चमकीला दिखता है।

सूर्य ग्रह उपग्रह तथा अन्य खगोलीय पिण्ड जैसे-क्षुद्र ग्रह, उल्का पिण्ड एंव धूमकेतु इत्यादि को सयुंक्त रूप से सौरमण्डल (Solar System) कहा जाता है। सूर्य को सौरमण्डल का मुखिया प्रधान कहा जाता है । ब्रह्माण्ड में वैसे तो कई सौरमण्डल हैं, लेकिन हमारा सौरमण्डल (Solar System) या सौर परिवार  सभी से अलग है, जिसका आकार एक तश्तरी जैसा है। हमारे सौरमण्डल (Solar System) में सूर्य और ये सभी खगोलीय पिंड हैं जो सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं तथा एक दूसरे से गुरत्वाकर्षण बल द्वारा सम्बन्धित रहते हैं ।

कापरनिकस ने सबसे पहले यह सिद्धान्त दिया था कि सभी ग्रह सूर्य के चारो ओर घूमते हैं। सौरमण्डल में सूर्य का आकार सबसे बड़ा है जिसका प्रभुत्व है, क्योंकि सौरमण्डल निकाय के द्रव्य का लगभग 99.999 द्रव्य सूर्य में निहित है। सौरमण्डल (Solar System) की समस्त ऊर्जा का स्रोत भी सूर्य ही है । सौरमण्डल (Solar System) के केन्द्र में सूर्य है तथा सबसे बाहरी सीमा पर वरूण (नेपच्युन) ग्रह है। 

 सूर्य (Sun)

सूर्य सौरमण्डल (Solar System) का प्रधान है और यह एक तारा है। सूर्य का व्यास 13 लाख 92 हजार किलोमीटर है, जो पृथ्वी के व्यास का लगभग 110 गुना है।  सूर्य पृथ्वी से 13 लाख गुना बड़ा है और पृथ्वी को सूर्यताप का 2 अरबवाँ भाग मिलता है। पृथ्वी से सूर्य की दूरी 14.9 लाख किमी. है। सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक आने में लगभग 8 मिनट 18 सेकंड लगते है। 

सूर्य के दीप्तिमान सतह को “प्रकाश मंडल ”(Photosphere) कहते हैं।  सूर्य की सतह का तापमान 6000 डिग्री सेल्सियस है। परिमंडल  सूर्य ग्रहण के समय दिखाई देने वाली ऊपरी सतह है।इसे सूर्य मुकुट भी कहते हैं।  सौरमण्डल (Solar System) के  कुल द्रव्यमान का 99.85 % भाग सूर्य में संचित है। सूर्य की संरचना का 98 भाग हाइड्रोजन तथा हीलियम से बना है।  

सूर्य से सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण तथ्य 

सूर्य से सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण तथ्य निम्नलिखित है

1) सूर्य सौर मंडल में सबसे बड़ा पिण्ड है। सूर्य सौरमण्डल (Solar System) के केन्द्र में स्थित एक तारा है जिसके चारों तरफ पृथ्वी और सौरमण्डल (Solar System) के अन्य अवयव घूमते हैं। 

2) सूर्य का जन्म 4.6 बिलियन साल पहले हुआ। यह ज्यादातर हाइड्रोजन और हीलियम गैस से बना हुआ है। 

3) सूर्य का व्यास 1,392.684 किलोमीटर है ।

4) सूर्य के प्रकाश की गति 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकण्ड है। 

5) सूर्य, पृथ्वी से लगभग 100 गुना अधिक बड़ा ग्रह है और यह पृथ्वी से लगभग 333.400 गुना अधिक भारी है। 

6) सूर्य की सतह, जो दीप्तिमान रहती है, उसे प्रकाश मण्डल कहा जाता है, इसका तापमान 5800K है। 

7) सूर्य आकाशगंगा का एक चक्कर 225-250 मिलियन वर्ष में पूरा करता है। 

8) सूर्य की आकाशगंगा के केंद्र से दूरी 27,000 प्रकाश वर्ष है । 

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सौरमंडल के पिण्ड (Bodies of Solar System)

अंतर्राष्ट्रीय खगोलशास्त्री संघ के प्राग सम्मेलन 24 अगस्त 2006 के अनुसार सौरमण्डल में विद्यमान पिंडों को तीन श्रेणियों में बाँटा गया है प्लूटो अब ग्रह की श्रेणी से बाहर होगा। इसे बौना ग्रह कहा गया (I.A.U.)द्वारा ग्रह की नई परिभाषा दी गई। इसके अनुसार, वह खगोलीय पिण्ड ग्रह कहलायेगा जो –

1)अपनी निश्चित कक्षा में सूर्य की परिक्रमा करता हो।

2) आकार में लगभग गोल हो। 

3) अन्य ग्रहों की कक्षा का अतिक्रमण नहीं करता हो। 

ध्यातव्य है कि प्लूटो की कक्षा अन्य ग्रहों की तुलना में झुकी हुई है तथा यूरेनस की कक्षा का अतिक्रमण करती है । इसी तथ्य के आधार पर प्लूटो को सौरमण्डल (Solar System) के नौ ग्रहों के परिवार से बाहर कर दिया गया।  ग्रहों के घटते हुए आकार के क्रम में नाम हैं -बृहस्पति, शनि, अरूण, वरूण, पृथ्वी, शुक्र, मंगल, बुध। प्राग सम्मेलन 24 अगस्त 2006 वो अनुसार सौरमण्डल में विद्यमान पिण्डों की तीन श्रेणियों को निम्नलिखित बताया गया है

1) प्रधान (परम्परागत) ग्रह (Major Planet)-

ग्रह सूर्य से इनकी दूरी के  बढ़ते क्रम में है। अर्थात् इनमें से बुध, शुक, पृथ्वी, मंगल, बृहस्पति, शनि, अरूण (यूरेनस) एवं वरूण (नेज्यून)। चार पार्थिव / स्थलीय आन्तरिक ग्रह और चार विशाल गैस से बने बाहरी ग्रह हैं।  बुध, सूर्य से सबसे करीब तथा नेपच्युन सबसे दूर स्थित ग्रह है। 

2) बौने गृह (Dwarf Planet)-

यम (Pluto) एरीज़ (Eris) सेरस (Ceres) हॉमिया (Haumea), माकीमाकी (Makemake) (प्लूटो को पहले खगोलीय वैज्ञानिक नवें ग्रह के रूप में मानते थे लेकिन अब नहीं मानते हैं) सेरेस (Ceres) क्षुद्रग्रह पट्टी में है और वरुण से दूर चार बौने ग्रह यम(Pluto) हॉमिया (Haumea) और एरीज (Eris) हैं। 

3) लघु सौरमण्डलीय पिण्ड (Small Solar System)

166 ज्ञात उपग्रह एवं अन्य छोटे खगोलीय पिण्ड जिनमें क्षुद्रग्रह पट्टी,  धूम्रकतु (पुच्छल तारे), उल्काएँ, बर्फीली क्वीपर पट्टी के पिण्ड और ग्रहों के बीच की धूल शामिल है। छह ग्रहों और तीन बौने ग्रहों की परिक्रमा प्राकृतिक उपग्रह करते है, जिन्हें साधारणत्त: पृथ्वी के चन्द्रमा के  नाम के आधार पर ‘चन्द्रमा’ ही पुकारा जाता है । प्रत्येक बाहरी ग्रह धूल और अन्य कणों से निर्मित छल्लों द्वारा परिवृत है । 

Plantes-of-solar-system
सौरमंडल के ग्रह (Plantes of Solar system)

ग्रह (Planets)

वे खगोलीय पिण्ड ग्रह कहलाते हैं, जो सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करता हो, उसमे पर्याप्त गुरुत्वाकर्षण बल हो, जिससे वह गोल स्वरूप ग्रहण कर सके, उसके ‘आस-पास का क्षेत्र साफ हो यानि उसके आस-पास अन्य खगोलीय पिंडों की भीड-भाड़ न हो।  

ग्रह  बुध,शुक्र, पृथ्वी, मंगल, वृहस्पति, शनि, वरूण तथा अरूण का विवरण निम्नवत् दिया गया है-

बुध (Mercury)

बुध ग्रह, सूर्य से सबसे पहला या सबसे समीप ग्रह है, यही कारण है कि इसका दैनिक तापान्तर सर्वाधिक है। द्रव्यमान में आठवाँ सबसे बड़ा ग्रह है इसकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति पृथ्वी की अपेक्षा एक चौथाई है। यह सौर मण्डल का सबसे छोटा ग्रह है जिसके पास उपग्रह नहीं है।  बुध ग्रह का व्यास 4880 किमी. है। सौर मण्डल मे दो चन्द्रमा-गुरु का गेनीमेड और शनि का टाईटन व्यास में बुध से बड़े हैं लेकिन द्रव्यमान में आधे हैं। बुध, सूर्य के काफी समीप होने के कारण इसे देखना मुश्किल होता है।  बुध को भी शुक्र की भांति ही प्रात: एवं सायं का तारा कहा जाता है क्योंकि दोनों ही ग्रह सूर्य तथा पृथ्वी के मध्य में स्थित हैं।

2) शुक्र (Venus)

शुक्र पृथ्वी का निकटतम ग्रह है । सूर्य से दूसरा और सौरमण्डल (Solar System) का छठवाँ सबसे बड़ा ग्रह है। शुक्र पर कोई चुम्बकीय क्षेत्र नहीं है।  इसका कोई उपग्रह भी नहीं है।  यह आकाश में सबसे चमकीला पिंड है। शुक्र ग्रह को प्रागैतिहासिक काल से जाना जाता है।  यह आकाश में सूर्य और चन्द्रमा के बाद सबसे अधिक चमकीला ग्रह या पिण्ड है।  इसे अनेक नामों जैसे-भोर का तारा  और शाम का तारा या आकाशीय पिण्ड के  नाम से जाना जाता है। 

शुक्र भी एक आन्तरिक ग्रह है, यह भी चन्द्रमा की तरह कलाएँ प्रदर्शित करता है। यह ग्रह घड़ी की सुई के  अनुरूप घूर्णन करता है। शुक्र एवं यूरेनस दोनों पूर्व से पश्चिम  घूर्णन करते हैं। इसीलिए यहाँ सूर्योदय पश्चिम दिशा में तथा सूर्यास्त पूरब दिशा में होता है ।

इसे पृथ्वी का ‘बहन ग्रह'(Sister Planet) भी कहा जाता है। सभी ग्रहों में शुक्र ग्रह सर्वाधिक चमकीला दिखता है । 

3) पृथ्वी (Earth)

यह आकार में पाँचवां सबसे बड़ा ग्रह है और सूर्य से दूरी के क्रम में तीसरा ग्रह है। पृथ्वी की आकृति त्रिविमीय होती है। इस ग्रह को अंग्रेजी में Earth कहते हैं। यह सौरमण्डल (Solar System) का एकमात्र ग्रह है, जिस पर जीवन है। इसका विषुवतीय या भूमध्यरेखीय व्यास 12,756 किलोमीटर और ध्रुवीय व्यास 12,714 किलोमीटर है । पृथ्वी अपने अक्ष पर झुकी हुई है।  

4) मंगल (Mars)

सौरमण्डल (Solar System) में मंगल ग्रह सूर्य से चौथे स्थान पर है। और आकार में सातवें क्रमांक का बड़ा ग्रह है । मंगल ग्रह को युद्ध का भगवान भी कहते हैं। इसे यह नाम लाल रंग के  कारण मिला।  पृथ्वी से देखने पर इसको इसकी रक्तिम आभा के कारण लाल ग्रह के रूप में भी जाना जाता है इसका रंग लाल आयरन ऑक्साइड के कारण है । 

मंगल को प्रागैतिहासिक काल से जाना जाता रहा है । फोबोस तथा डीबोस इसके दो उपग्रह हैं। 

वृहस्पति (Jupiter)

वृहस्पति यह सौरमण्डल (Solar System) का सबसे बड़ा ग्रह है। इस कारण इसे ‘मास्टर ऑफ गॉड्स’ (Master of Gods) भी कहा जाता है । इसका रंग पीला है । इस ग्रह को अंग्रेजी  में Jupiter कहते हैं।  इसमें सर्वाधिक हाइड्रोजन पाई जाती है। अब तक इसके  कुल प्राकृतिक उपग्रह ज्ञात है।  इसका द्रव्यमान शेष सभी ग्रहों के सम्मिलित द्रव्यमान से भी अधिक है। वृहस्पति ग्रह मुख्यत: हाइड्रोजन एवं हीलियम गैसों से मिलकर बना है।  

6) शनि (Saturn)

यह आकार में वृहस्पति के  बाद सौरमण्डल (Solar System) का दूसरा सबसे बड़ा ग्रह है। इस ग्रह को अंग्रेजी में Saturn कहते हैं। यह आकाश मे पीले तारे के समान दिखाई पड़ता है। इसका गुरुत्व पानी से भी कम है। शनि ग्रह को गैसों का गोला भी कहा जाता है। अपने तीव्र घूर्णन के कारण ही यह  ग्रह सौरपरिवार का सबसे चपटा ग्रह है। शनि ग्रह के चारों ओर तीन वलय हैं।  वलयों को नग्न आँखों से नहीं देखा जा सकता।  इस छल्ले (वलय) रूपी विशेषता के कारण शनि ग्रह को आकाशगंगा सदृश्य ग्रह”(Galaxy Like Planet) कहा जाता है। इस ग्रह के सर्वाधिक 30 उपग्रह हैं इसका सबसे बडा उपग्रह “टाइटन” है। 

7 ) अरुण (Uranus)

पह आकार में तीसरा सबसे बड़ा ग्रह है।  इसे अंग्रेजी में Uranus कहते हैं।  इसकी खोज 1781 ई. में विलियम हर्शल द्वारा की गई थी। इसके चारो ओर नौ वलयों में पाँच वलयों का नाम अल्फा, बीटा, गामा, डेल्टा एवं इप्सिलॉन है। इस ग्रह में घना वायुमण्डल पाया जाता है।  जिसमे मुख्य रूप से हाइड्रोजन व अन्य गैसे हैं। 

8) वरुण (Neptune)

 नई खगोलीय व्यवस्था में यह सूर्य से सबसे दूर स्थित ग्रह है इसकी खोज सन्  1846 ई में जर्मन खगोलशास्त्री  जॉन ग्ले और अर्बर ले बेरिअर ने की है। इस ग्रह को अंग्रेजी में Neptune कहते हैं। यह 166 वर्षो में सूर्य की परिक्रमा करता है तथा 12.7 घंटे में अपनी दैनिक गति पूरा करता है।  नई खगोलीय व्यवस्था में यह सूर्य से सबसे दूर स्थित ग्रह है ‘और सौरमण्डल (Solar System) का 8वां ग्रह है।  

 उपग्रह (Satellites)

उपग्रह को अंग्रेजी भाषा में सेटेलाइट (Satellite) कहा जाता है जिसका शाब्दिक अर्थ होता है। साथी या सहचर। उपग्रह अपने नाम को सार्थक करते हैं और साथ परिक्रमा करते हैं। दूसरे शब्दों में किसी ग्रह के  चारों ओर परिक्रमा करने वाले पिण्ड को उस ग्रह का उपग्रह जाता है। जैसे-चन्द्रमा, पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह है जबकि, INSAT-B पृथ्वी का कृत्रिम उपग्रह है। उपग्रह की कक्षीय चाल कक्षीय त्रिज्या पर निर्भर करती है । पृथ्वी तल के अति निकट चक्कर लगाने वाले उपग्रह की कक्षीय चाल लगभग 7.9 या 8 किमी./सेकण्ड होती है । पृथ्वी के  अति निकट चक्कर लगाने वाले उपग्रह का परिक्रमण काल 74 मिनट का होता हे । यह आवश्यक नहीं है कि प्रत्येक ग्रह का उपग्रह हो तथा सभी ग्रहों के उपग्रहों की संख्या समान होना भी जरूरी नहीं है । 

चन्द्रमा (Moon)

वायुमण्डल विहीन पृथ्वी का एकमात्र उपग्रह चन्द्रमा है। जिसकी पृथ्वी से दूरी 3,84,365 किमी. है।  यह सौरमण्डल का पाँचवां सबसे विशाल प्राकृतिक उपग्रह है। चन्द्रमा की सतह और उसकी आन्तरिक सतह का अध्ययन करने वाला विज्ञान सेलेनोलॉजी कहलाता है। 

चन्द्रमा, पृथ्वी की एक परिक्रमा लगभग 27 दिन व 8 घण्टे में करता है।  इतने ही समय में यह अपनी अक्ष पर भी घूर्णन करता है। यही कारण है कि हमें चन्द्रमा का सदैव एक भाग दिखाई पड़ता है। चन्द्रमा पर न पानी है न वायु।  इसके धूल के  मैदान को शान्तिसागर कहते हैं। यह चन्द्रमा का पिछला भाग है, जो अन्धकारमय होता है। 

 चाँद के बारे में रोचक तथ्य 

1) चन्द्रमा धरती के आकार का केवल 27% है। 

2) चन्द्रमा पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह है। 

3) चन्द्रमा 4.5 अरब साल पहले पृथ्वी और थीया (मार्स के आकार का तत्त्व) के बीच हुए भीषण टकराव के  बाद बचे हुए अवशेषों के मलबे से बना था। 

4) सौरमण्डल (Solar System) के 63 उपग्रहों में चाँद का आकार 5वें नम्बर पर है । 

5) चंद्रमा की गुरुत्वाकर्षण शक्ति पृथ्वी से कम है। अगर आँकडों में बात की जाए तो चांद पर इंसान का वजन 16.5% कम होता है। यही कारण है कि चांद पर अंतरिक्ष यात्री ज्यादा उछल-कूद कर सकते हैं। 

6) चाँद का वजन लगभग 81 ,00,00,00,000 (81 अरब) टन है। 

7) चाँद 27 दिन, 7 घंटे, 43 मिनट, 11.6 सेकंण्ड में पृथ्वी का एक चक्कर पूरा करता है। 

8) चन्द्रमा पूर्व में उगता है और पश्चिम में छिपता है । 

9) रॉकेट से चन्द्रमा तक जाने में 13 घंटे लगते हैं।  इतनी दूर कार से जाने में करीब 130 दिन लगेंगे।

10) चन्द्रमा का क्षेत्रफल अफ्रीका महाद्वीप के क्षेत्रफल के ठीक बराबर है । 

कृत्रिम उपग्रह (Artificial Satellite)

ये मानव निर्मित ऐसे उपकरण हैं, जो पृथ्वी की निश्चित कक्षा में उसकी परिक्रमा करते हैं। अपने संतुलन को बनाए रखने के लिए ये उपग्रह अपने अक्ष पर भी घुमते रहते हैं। कृत्रिम उपग्रह अंतरिक्ष में कुछ प्रमुख उद्देश्यों के लिए प्रक्षेपित किए जाते हैं जिनमें दूरसंचार, मौसम विज्ञान सम्बन्धी अध्ययन और अंतर्राष्ट्रीय जासूसी प्रमुख हैं।

कृत्रिम उपग्रहों से सम्बन्धित्त कुछ प्रमुख तथ्य निम्नवत् हैं।

1) वर्ष 1957 में सर्वप्रथम रूस ने एक कृत्रिम उपग्रह स्पुतनिक-1अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया था। ‘स्पुतनिक-1′ के पश्चात् हजारों कृत्रिम उपग्रह अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किए गए। वर्ष 1975 में बहुत से कृत्रिम उपग्रह पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे हैं। 

2) भारत ने अपना पहला कृत्रिम उपग्रह 19 अप्रैल, 1975 को रूस से अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया। भारत के  इस कृत्रिम उपग्रह का नाम पाँचवीं शताब्दी के भारतीय खगोलशास्त्री एवं गणितज्ञ आर्यभट्ट के नाम पर ‘आर्यभट्ट’ रखा गया था। 

3) उपग्रह आर्यभट्ट का भार 3560 किलोग्राम है। यह 8 किलोमीटर प्रति सेकण्ड की गति से पृथ्वी की परिक्रमा कर रहा है और 93.41 मिनट में एक परिक्रमा पूरी कर लेता है। 

क्षुद्र ग्रह (Asteroids)

क्षुद्र ग्रह या अवांतर ग्रह पथरीले और धातुओं के ऐसे पिण्ड हैं जो सूर्य की परिक्रमा करते हैं लेकिन इतने लघु हैं कि इन्हें ग्रह नहीं कहा जा सकता। इन्हें लघु ग्रह या क्षुद्र ग्रह या ग्रहिका कहते हैं। हमारी सौर प्रणाली में लगभग 100,000 क्षुद्रग्रह हैं। लेकिन उनमें से अधिकतर इतने छोटे हैं कि उन्हें पृथ्वी से नहीं देखा जा सकता। प्रत्येक क्षुद्र ग्रह को अपनी कक्षा होती है, जिसमें ये सूर्य के ‘आस-पास’ घुमते रहते हैं इनमें से सबसे बड़ा क्षुद्र ग्रह है ’सेरेस’। 

खगोलवेत्ता पियाजी (Piazzi) ने इस क्षुद्र ग्रह को जनवरी 1801 में खोजा था। केवल ‘वेस्टाल ही एक ऐसा क्षुद्रग्रह है जिसे नग्न आंखो से देखा जा सकता है यद्यपि इसे सेरेस क बाद खोजा गया था। इनका आकार 1000 किमी. व्यास के सेरस से 1 से 2 इंच के पत्थर के टुकड़ों तक होता है। यह क्षुद्र ग्रह पृथ्वी की कक्षा के अन्दर से शनि की कक्षा से बाहर तक है।  

इनमें से दो तिहाई क्षुद्र ग्रह मंगल और बृहस्पति के बीच में एक पट्टी में हैं। ‘हिंडाल्गो’ नामक क्षुद्रग्रह की कक्षा मंगल तथा शनि ग्रहों के बीच पड़ती है । ‘हर्मेस’ तथा ‘ऐरोस‘ नामक क्षुद्रग्रह पृथ्वी से कुछ लाख किलोमीटर की ही दूरी पर हैं। 

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Sneha Katiyar

My name is Sneha Katiyar. I am a student. I like reading books

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