Mid day meal योजना का प्रारम्भ, उद्देश्य, गुण, दोष

Mid day meal योजना क्या है? इसकी शुरुआत कब हुई –

1990 में विश्व कॉन्फ्रेंस में ‘सबके लिए शिक्षा’ की घोषणा की गई जिससे सभी देशों में प्राथमिक शिक्षा के प्रसार में तेजी आई 1994 ने सरकार ने शैक्षिक रूप से पिछड़े  जिलों के  लिए “जिला प्राथमिक शिक्षा कार्यक्रम’ (DPEP) शुरू किया। 15 अगस्त 1995 को सरकार ने छात्रों को स्कूलों की तरफ आकर्षित करने तथा उन्हें रोक रखने के  लिए “mid-day-meal योजना” शुरू की जिसे ’पौष्टिक आहार सहायता का राष्ट्रीय कार्यक्रम’ भी कहा जाता है। 

भारत में प्राथमिक शिक्षा की उत्तम व्यवस्था हेतु भारत के स्वतंत्रोपरांत ही बहुत सी नीतियों बनाई गई। चूंकि हमारा उददेश्य निश्चित आयु वर्ग के सभी बालकों के लिए प्राथमिक शिक्षा निःशुल्क व अनिवार्य के  लक्ष्य को पाना था । प्राथमिक शिक्षा के  प्रसार तथा उन्नयन के लिए सुझाव देने के सम्बन्ध में 1957 में सरकार ने “अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षा परिषद“ का गठन किया । इस परिषद ने प्राथमिक शिक्षा के प्रसार व उन्नयन के  सम्बन्ध में ठोस सुझाव दिए जिससे प्राथमिक  शिक्षा के प्रसार मे तेजी आई । 1965 में ‘राष्ट्रीय शिक्षा आयोग’ ने अपना प्रतिवेदन सरकार के समक्ष पेश किया।  इस आयोग ने बिना किसी भेदभाव के  हर धर्म, जाति व लिंग के छात्रों  के लिए शैक्षिक अवसरों की समानता पर बल दिया ।

इस आयोग के सुझावों के आधार पर ‘राष्ट्रीय  शिक्षा नीति, 1968′ घोषित हुई इसमें भी प्राथमिक शिक्षा को निःशुल्क व अनिवार्य करने के सम्बन्ध में ठोस नीतियाँ  दी गई। उसके बाद कांग्रेस के कार्यकाल में “राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 1995’ आयी  इस शिक्षा नीति में शिक्षा का सार्वभौमीकरण करना प्रमुख लक्ष्य निर्धारित किया गया इसके लिए 1985 में सरकार नेOperation Black Boardयोजना का प्रारम्भ किया और प्राथमिक शिक्षा के लिए आधारभूत सुविधाएं मिलना शुरू हो गई। 

Mid-day meal योजना के उददेश्य 

Mid-day meal योजना के निम्न उददेश्य हैं-

1) प्राथमिक स्कूलों में छात्रों की प्रवेश संख्या में वृद्धि करना । 

2) प्राथमिक स्तर पर अपव्यय को रोककर बालकों को प्राथमिक स्कूलों में रोके रखना । 

3) छात्रों की नियमित उपस्थिति में बृद्धि करना । 

4) छात्रों को पौष्टिक भोजन के द्वारा स्वास्थ्य लाभ देना। 

5) बिना किसी भेदभाव के  एक साथ भोजन करने से भ्रातृत्व का भाव उत्पन्न करना, जातिभेद खत्म करना । 

मिड-डे मील योजना केंद्र सरकार के द्वारा शुरू की गई।  इस योजना में केंद्र और राज्य सरकारें 75:25 के अनुपात में व्यय करती हैं । सरकार भोजन के  लिए खाद्य सामग्री (गेहूं चावल व अन्य पदार्थ) उपलब्ध कराती है। भोजन कराने के लिए 25 बालकों पर एक रसोइया तथा एक सहायक, 25 से अधिक बालकों पर 2 रसोइये तथा दो सहायकों की व्यवस्था है जो भोजन पकाने का कार्य करते हैं। 

Mid-day meal योजना के क्षेत्र 

Mid-day-meal-yojna

प्रारम्भ में यह योजना केवल सरकारी प्राथमिक स्कूलों में लागू की गई । 1997-98 तक इसे देश के  सभी प्रान्तों के स्कूलों में लागू किया जा चुका था । 2002 में इस योजना में मुस्लिमों द्वारा चलाए जा रहे मदरसों को भी शामिल कर लिया गया । 2007 में उच्च प्राथमिक स्कूलों को भी इस योजना का लाभ मिलना शुरू हो गया । वर्तमान में कुछ सरकारी आर्थिक सहायता, मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को इस योजना में भी शामिल कर लिया गया है । 2014-15 में यह योजना लगभग साढ़े ग्यारह लाख प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्कूलों में चल रही थी । इससे साढ़े दस करोड़  बच्चे लाभान्वित  हो रहे हैं। 

Mid-day meal की आवश्यकता 

विश्व खाद्य कार्यक्रम (WFP) वर्तमान में कुपोषण और खाद्य असुरक्षा के  स्तर को सुधारने के लिए खाद्य आधारित सुरक्षा तन्त्र को सशक्त करने में सहयोग करता है । भारत में इसके  सहयोग में mid-day meal कार्यक्रम चलाया जिसकी आवश्यकता को निम्न प्रकार से स्पष्ट कर सकते हैं।

1)फोर्टिफिकेशन-

फोर्टिफिकेशन एक प्रयास और परीक्षण प्रक्रिया है जिसके माध्यम से खाद्य पदार्थों में सूक्ष्म पोषक तत्वों को जोड़ा जाता है।  चावल और गेहूँ जैसे स्टेपल की फोर्टिफाई  लोहे और विटामिन “ए” के साथ सफलतापूर्वक सफल हुआ है। 

पकाए हुए भोजन को भी प्री-मिक्स सूक्ष्म पोषक तत्वों के  साथ मजबूत किया जा सकता  है । एक उचित लागत मूल्य पर सूक्ष्म पोषक तत्वों की स्थिति में सुधार किया जा सकता है । डब्लूएफपी, ओडिशा की सरकार के साथ मिलकर एक जिले में एमडीएम चावल में लौह तत्त्व का चालन किया 1 एक साल के भीतर एनेमिया के मामलों में 5% की गिरावट आ गई। 

2)एकीकृत सुरक्षित तथा स्वच्छ आदतें 

MDM (mid-day meal) में सुरक्षित और स्वच्छ आदतों को एकीकृत करना सुनिश्चित करना आवश्यक है । यह खाद्य आपूर्ति श्रृंखला के द्वारा तैयारी एवं उपभोग के  समय निर्धारित किया जा सकता  है। पाक और भण्डारण सुविधाओं में स्वच्छता होना आवश्यक है । इसके अतिरिक्त हाथ धोने के तथा वस्तुओं को साफ करने के लिए सतत जल आपूर्ति, एप्रेन के साथ उपयुक्त किट  रसोइए के लिए दस्ताने और कैप्स, सुरक्षित खाद्य अपशिष्ट निपटान की आवश्यकता है। प्रत्येक विद्यालय में शौचालय बनाने के लिए सरकार की ओर से पहल की आवश्यकता है। 

3)विद्यालय प्रबंधन में सुधार-

विद्यालय प्रबंधन में रसोई कर्मचारी तथा छात्र स्वयं योजना के  आवश्यक सहयोग के लिए प्रबन्धन करता है। रसोई में कार्य करने वाले कर्मचारियों के स्वास्थ्य की नियमित जांच होना आवश्यक है तथा उन्हें अच्छी स्वास्थ्य आदतों को अपनाना चाहिए जैसे खाना बनाने से पहले हाथ धोना आदि । स्वच्छ हाथ, स्वच्छ बर्तन, स्वच्छ खाना पकाना तथा स्वच्छ रसोई तीन महत्त्वपूर्ण सन्देश है जो विद्यालय प्रबन्धन में सम्मिलित होने चाहिए । पोषण को सफलतापूर्वक सुधारने के लिए खाद्य, स्वास्थ्य स्वच्छ पेय जल के साथ किया जा सकता है। एमडीएम भारत के  पोषण सम्बन्धी आवश्यकताओं के  लिए सहयोग करते है। 

लेकिन इनमें स्वच्छता और पोषण सम्बन्धी मूल्य के बारे में कुछ खामियाँ है जिनको दूर करने की आवश्यकता है। 

Mid-day meal योजना का क्षेत्र एवं कार्यप्रणाली 

प्रारम्भ में यह योजना केवल सरकारी प्राथमिक स्कूलों में लागू की गई । 1997-98 तक इसे देश क सभी प्रान्तो के  स्कूलों में लागू किया जा चुका था । 2002 में इस योजना में मुस्लिमों द्वारा चलाए जा रहे मदरसों को भी शामिल कर लिया गया । 2007 में उच्व प्राथमिक स्कूलों को भी इस योजना का लाभ मिलना शुरू हो गया । वर्तमान में कुछ सरकारी आर्थिक सहायता, मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को इस योजना में भी शामिल कर लिया गया है । 2014-15 में यह योजना लगभग साढे ग्यारह लाख प्राथमिक एवं उच्च प्राथमिक स्कूलों में चल रही थी । इससे साढ़े दस लाख बच्चे लाभान्वित हो रहे है । 

Mid-day meal योजना की कार्य प्रणाली 

इस योजना को राज्य सरकारों की सर्व शिक्षा अभियान समितियों के द्वारा संचालित कराया जाता है। ये समितियां अपने-अपने क्षेत्र में इस योजना का संचालन तथा निगरानी करती हैं । ग्रामीण क्षेत्रों में स्कूलों में ही भोजन तैयार कराया जाता है । शहरी क्षेत्रो में ठेकेदारों के द्वारा भोजन उपलब्ध कराया जाता है । सरकारी दावे के अनुसार कक्षा 1 से 5 तक प्रत्येक बच्चे को प्रतिदिन 100 ग्राम अनाज, दाल, सब्जी दिए जा रहे हैं और कक्षा 6 से कक्षा 8 तक प्रत्येक छात्रो को प्रतिदिन 150 ग्राम अनाज, दाल, सब्जी दिए जा रहे हैं। 

शैक्षिक परिणामों पर मध्याह्न भोजन का प्रभाव-

भारत सरकार ने 1995 में राष्ट्रीय  स्कूल भोजन कार्यक्रम Mid Day Meal स्कीम (MDM) का शुभारम्भ किया । इसका उददेश्य सरकारी एवं सरकारी अनुदानित विद्यालयों में कक्षा 1 से 8 के बच्चों के पोषण में सुधार करना है । यह विद्यालय उपस्थिति और स्कूल में  बच्चों की भागीदारी को बढ़ावा देने‘ के लिए भी डिजाइन किया गया है । एमडीएम का उददेश्य प्राथमिक विद्यालय के  बच्चों को 450  कैलोरी और 12 ग्राम प्रोटीन तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय के बच्चों को 700 कैलोरी और 20 ग्राम प्रोटीन उपलब्ध कराना है। इसके  अतिरिक्त पर्याप्त मात्रा में लौह और फोलिक एसिड जैसे सूक्ष्म पोषक तत्वों को भी प्रदान करना है । 

किसी भी कार्यक्रम के  प्रभाव का आकलन करने के लिए एक पूर्व और पोस्ट आदर्श डिजाइन होता है जो नियन्त्रण समूह के  साथ हस्तक्षेप करते है । चूँकि इस कार्यक्रम में आधारभूत जानकारी उपलब्ध नहीं थी, इसीलिए 30 स्कूलों का एक सेट नियन्त्रण समूह के रूप में MDM (mid-day meal) कार्यक्रम के बिना तुलनीय सामाजिक आर्थिक पृष्ठभूमि के  लिए प्रयोग किया गया था । दोनों स्कूलों के  सेट उसी भौगोलिक क्षेत्र के थे, जो अनिवार्य रूप से समान सामाजिक आर्थिक पृष्ठभूमि के थे। प्रत्येक विद्यालय में नैदानिक परीक्षा और शैक्षिक प्रदर्शन के  लिए 5 लड़के  तथा 5 लड़कियों का चयन प्रत्येक विद्यालय से किया गया।  यदि किसी कक्षा में लड़कों या लड़कियों की संख्या दस से कम थी,  तो सभी उपस्थिति छात्रों को चयन में सम्मिलित किया गया। इन चयनित विद्यालयों में निम्नलिखित का आकलन किया गया। 

1) विद्यालय नामाँकन –

प्रत्येक गांव में 6-11 साल के  बच्चों की कुल संख्या या विद्यालय में दाखिला प्रतिशत

उपस्थिति –

बच्चों ने पिछले वर्ष 60% कार्य दिवसों में उपस्थित हुए

प्रतिधारण –

एक ही सेल नम्बर पर 5 वर्ष के लिए जारी रखने वाले छात्रों की संख्या 

विद्यालय छोडने की दर –

पिछले 5 वर्षों में छात्रों की संख्या में कमी / गिरावट

2) मानवमिति-

लम्बाई और वजन 

नैदानिक परीक्षा-

बच्चों के उप नमूने के द्वारा बच्चों की पोषण सम्बन्धी स्थिति। 

3) पिछले साल वार्षिक परीक्षा में बच्चों द्वारा प्राप्त अंकों के  आधार पर शैक्षिक प्रदर्शन। 

4) पोषक तत्त्व तथा उनके उपभोग के  परिणाम। 

प्रत्येक कक्षा 1 से 5 (6-11 वर्ष) के दस छात्रों (जिसमें एक लड़का और एक लड़की अनिवार्य) को एमडीएम के अंतर्गत अवलोकित किया गया, जब वे सप्लीमेन्ट का उपभोग कर रहे थे। भोजन की जितनी मात्रा प्राप्त हुई उसे परोसने के  समय मापा गया। इसके  अतिरिक्त प्रतिदिन जिस अनुपात में राशन निकाला गया, किस प्रकार भोजन बनाया गया तथा उसके भण्डारण का बारीकी से अवलोकन किया गया था । प्रति छात्र पोषक भोजन से प्राप्त ऊर्जा एवं प्रोटीन की गणना भी की गई थी। 

पोषण सम्बन्धी स्थिति का मूल्यांकन एमडीएम स्कूलों में 1361 बच्चों और गैर एमडीएम स्कूलों में 1333 बच्चों पर किया गया था। ये वे बच्चे थे जिम्हें मानवमिति एवं नैदानिक परीक्षा के  लिए चयनित किया गया था । इस प्रकार mid-day meal कार्यक्रम के  प्रभावशीलता को निम्नलिखित प्रकार से समझ सकते हैं –

1) नामांकन स्थिति –

छात्रों की कुल संख्या (6-11वर्ष ) जो स्कूल नामांकन के  योग्य थे, वे कुल जनसंख्या का 14% थे। अतः मिड डे मील कार्यक्रम के साथ स्कूलों में दाखिला संख्या 68% तक हो गई । 

2)उपस्थिति –

मिड-डे मील के प्रभाव से छात्रों की उपस्थिति में बढ़ोत्तरी हो गई है।

3)प्रतिधारण दर –

एमडीएम स्कूलों में कक्षा एक में दाखिला लेने वाले छात्रों की संख्या (80.2%) किया जो गैर एमडीएम स्कूलों से बेहतर थी । इन छात्रों को अगले 4 वर्षो के लिए दाखिला एवं पदोन्नति दी गई । मिड डे मील कार्यक्रम ने लड़कियों की प्रतिधारण  को कम किया है । mid-day meal ने प्रतिधारण दर को उचित तरीके  से कम किया है। 

4) ड्रॉप आउट –

Mid-day meal ने विद्यालय में छात्रों की संख्या को बढाने में सहयोग किया जो छात्र बीच में ही पढ़ाई छोड़ देते हैं उनके लिए ये कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र है जिससे वे विद्यालय में रुकने क लिए बाध्य हो गए । 

5) शैक्षिक प्रदर्शन –

वार्षिक परीक्षा में प्रत्येक बच्चे द्वारा प्राप्त अंक स्कूल के  रिकॉर्ड से एकत्र किए गए थे जो सामान्य तौर पर उददेश्य के  लिए स्कूलों में अपनाए गए ग्रेड के अनुसार वितरित किए गए थे । मिड-डे मील स्कूलों में ग्रेड A वाले छात्रों का अनुपात बढ़ गया है । 

Mid-day meal के  प्रभाव से छात्रों की स्कूल गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी देखी जा रही है। कुल दाखिला दर को प्रोत्साहन मिला है । शैक्षिक सुविधाओं के साथ-साथ अच्छे स्वास्थ्य के  अवसर भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। विद्यालय में बालिकाओं की संरव्या में वृद्धि तथा छात्रों के पोषण स्तर को बढ़ाने के लिए mid-day meal उत्तरदायी है । mid-day meal में उपलब्ध पोषक भोजन की गुणवत्ता में भी सुधार किया जा रहा है।  प्रत्येक राज्य के mid-day meal मानक वहाँ की आवश्यकता के  अनुसार ही निर्धारित किए गए है।

यह भी पढ़ें

NCF 2005 In Hindi (राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा )

Mid-day meal योजना का मूल्यांकन 

गुण –

Mid-day meal योजना के प्रमुख गुण इस प्रकार हैं-

1) इस योजना को लागू करने के  बाद से स्कूलों में प्रवेश लेने वाले छात्रों की संरव्या में वृद्धि हुई।

2) पिछड़ी जाति, अनुसूचित जाति एवं जनजाति व मुस्लिम छात्रों का नामांकन बढ़ा है।  

3) इस योजना के बाद से ही बीच में स्कूल छोड़ जाने वाले छात्रों की सख्या में कमी आयी है।

4)इस योजना को शिक्षा सत्र 2014-15 तक देश के साढ़े ग्यारह लाख स्कूलों में लागू किया जा चुका हैं।

दोष –

Mid-day meal योजना के प्रमुख दोष इस प्रकार हैं –

1) योजना के  लिए स्कूलों को प्रदान की जा रही धनराशि का सही प्रयोग नहीं किया जा रहा है । 

2) आए दिन समाचार पत्रों में खबरें प्रकाशित होती रहती हैं कि mid-day mealखाने से छात्रों की तबीयत खराब हो गई । इसका प्रमुख कारण है mid-day meal बनाते समय सफाई का ठीक प्रकार से ध्यान न रखना। 

3) योजना के प्रति स्कूल गम्भीर नहीं है जिससे यह योजना ठीक प्रकार से चल नहीं पा रही है।

4) कोई भी योजना छात्रों के  जीवन से खिलवाड़ करने की इजाजत नहीं देती है, इस योजना के प्रति गम्भीरता न होने से यह बालकों के  लिए ये ज्यादा कष्टदायी सिद्ध हो रही है । 

Mid-day meal योजना का सारांश 

इस योजना में अच्छाइयाँ तो हैं परन्तु साथ में कुछ बुराइयाँ भी हैं । इस योजना को लागू हुए बहुत समय हो गया है परन्तु इससे जो लाभ होने चाहिए थे, उनका प्रतिशत कम है । यदि इस योजना से जुड़े व्यक्ति अपना कार्य निष्ठा व ईमानदारी से करें तो इस योजना से बहुत से लाभ हो सकते है । अपव्यय की समस्या का समाधान तथा सार्वभौमीकरण के  लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है । इस योजना में हो रही लापरवाही की जाँच कराकर दोषी व्यक्तियों को कड़ी  से कड़ी सजा मिलनी चाहिए तब ही यह योजना अपने उददेश्यों को प्राप्त कर पाएगी। 

Mid-day meal योजना से सम्बंधित महत्वपूर्ण प्रश्न 

1) उत्तर प्रदेश में mid-day meal योजना कब प्रारम्भ हुई? 

a) 1999-2000

b) 1997-98

c) 1990-91 

d) 1995–96 

उत्तर -(d)

2)मध्याह्न भोजन योजना का ध्येय है –

a) भूखे बालकों को दया करके भोजन खिलाना। 

b) बालकों को प्रलोभन देना। 

c) विद्यालय को धर्मस्थल तथा भण्डारे जैसा स्वरूप प्रदान करना। 

d) बालकों को पौष्टिक आहार देकर पोषण सम्बन्धी आवश्यकताओं की पूर्ति करना।  

उत्तर -(d)

3)मध्याह्न भोजन वितरण योजना आवश्यक है –

a) बच्चों के  स्वास्थ्य के  लिए। 

b) विद्यालय में बच्चों की उपस्थिति बनाए रखने के लिए। 

c) पढ़ने में रुचि बनाए रखने के  लिए 

d) उपर्युक्त में से कोई नहीं। 

उत्तर -(b)

4) मदरसों में mid-day meal योजना का प्रारम्भ कब हुआ?

a) 2002 में

b) 2003 में

c) 2004 में

d) 2005 में

उत्तर -(a)

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Sneha Katiyar

My name is Sneha Katiyar. I am a student. I like reading books

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