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ओजोन परत क्या है? || Ozone Parat Kya Hai

ओजोन परत क्या है? 

ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से मिलकर बनने वाली गैस को ओजोन गैस कहते हैं। यह गैस वायुमंडल में बहुत कम मात्रा में पाई जाती है। इसे 03 के संकेत से प्रदर्शित करते हैं। जमीन की सतह के ऊपर अर्थात निचले वायुमंडल में यह एक खतरनाक दूषक है, जबकि ऊपरी वायुमंडल में ओजोन परत के रूप में यह सूर्य के पराबैंगनी विकिरण या अल्ट्रावायलेट किरणों से पृथ्वी की रक्षा करती है। 

ओजोन का निर्माण कैसे होता है? 

इसका निर्माण मुख्यत: पराबैंगनी विकिरण द्वारा होता है। ओजोन निर्माण की प्रक्रिया दो चरणों में संपन्न होती है। पहले चरण के अंतर्गत सूर्य के प्रकाश में उपस्थित उच्च ऊर्जा युक्त किरणें ऑक्सीजन के अणु को दो परमाणुओं में तोड़ देती हैं। दूसरे चरण में प्रत्येक ऑक्सीजन परमाणु, ऑक्सीजन अणु से क्रिया करके ओजोन (03) का निर्माण करता है। और यह क्रिया तब तक चलती रहती है, जब तक समतापमंडल में पराबैंगनी किरणें उपस्थित रहती हैं। 

ओजोन परत कहाँ पायी जाती है? 

यह परत समतापमंडल के निचले हिस्से में पृथ्वी से लगभग 10 से 50 किमी. की ऊंचाई पर स्थित होती है, परतुं परत के रूप में इसका सर्वाधिक संकेंद्रण 20 से 35 किमी. के मध्य ही पाया जाता है। इसका 10% ट्रोपोस्फीयर (क्षोभमंडल) तथा 90% स्ट्रैटोस्फीयर (समतापमंडल) में पाया जाता है। ओजोन परत सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों को पृथ्वी पर आने से रोकती है। पृथ्वी पर इसकी सघनता मौसम एवं अन्य भौगोलिक कारकों पर निर्भर करती है। समतापमंडल में ओजोन के स्तर को प्राकृतिक रूप से नाइट्रोजन डाइआक्साइड द्वारा विनियमित किया जाता है। इस परत की मोटाई मौसम के हिसाब से बदलती रहती है। बसंत ऋतु में इसकी मोटाई सबसे अधिक तथा वर्षा ऋतु में सबसे कम होती है। 

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ओजोन परत को मापने की इकाई

ओजोन परत को डॉबसन इकाई में मापा जाता है। 1 डॉबसन यूनिट 0 डिग्री सेल्सियस  तथा 1atm  दाब पर, शुद्ध ओजोन की 0.01 मिमी की मोटाई के बराबर होती है। 

सर्वप्रथम ओजोन छिद्र का पता किसने लगाया? 

वर्ष 1985 में सर्वप्रथम ब्रिटिश दल के द्वारा टोटल ओजोन मैपिंग स्पेक्ट्रोमीटर’ की मदद से अंटार्कटिका के ऊपर ओजोन छिद्र का पता लगाया गया था। 

ओजोन परत के क्षरण में क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC) की भूमिका 

  • ओजोन छिद्र के लिए क्लोरोफ्लोरोकार्बन  उत्तरदायी है। CFC क्लोरीन, फ्लोरीन एवं कार्बन के मानव निर्मित योगिक हैं।
  • CFC ग्रीन हाउस प्रभाव में योगदान देने के साथ-साथ ओजोन परत की ओजोन गैस से अभिक्रिया करके ओजोन को ऑक्सीजन के रूप में विघटित कर देता है, जिससे ओजोन परत का क्षरण होता है। 
  • क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFC) मानव निर्मित रसायनों का एक समूह है, जो रंगहीन एवं गंधहीन है तथा सरलता से द्रव में परिवर्तित हो जाता है। 
  • यह ओजोन परत के ह्रास के लिए प्रमुख उत्तरदायी गैस है। यह एक अत्यधिक स्थायी यौगिक है, जो वायुमंडल में 80-90 वर्षों तक बना रह सकता है। 
  • क्लोरोफ्लोरोकार्बन, क्लोरीन, फ्लोरीन एवं कार्बन से बना मानव निर्मित गैसीय व द्रवीय पदार्थ है, जो कि रेफ्रिजरेटर तथा वातानुकूलित (Air-conditioner) यंत्रों में शीतकारक के रूप में प्रयोग किया जाता है। 
  • 1960 के दशक से रेफ्रिजरेटरों, एयरकंडीशनरों, स्प्रे केस, विलायकों,  फोम के निर्माण, दाबीकृत प्रसाधनों, उद्योगों में सूक्ष्म मार्जन कार्यों, इलेक्ट्रानिक अवयवों की सफाई करने एवं अन्य अनुप्रयोगों में इसका उपयोग बढ़ता जा रहा है। 
  • इसका प्रयोग रफ्रिजरेटर के साथ-साथ प्लास्टिक फोम एयरकंडीशनर्स, विमान प्रणोदक आदि में किया जाता है। 
  • फ्रिजों में प्रशीतक के रूप में भरी जाने वाली गैसों का विपणन सामान्यत: ‘मेक्रोन’ ब्रांड नाम के तहत किया जाता है। ये सामन्यतयः हैलोनिक हाइड्रोकार्बन (Dichlorodifluoro Methane, HCFC आदि) होते हैं। हालांकि अमोनिया भी प्रशीतक के रूप में बड़े संयंत्रों में प्रयुक्त होती है।

ओजोन परत की क्षीणता के लिए उत्तरदायी कारक 

ओजोन-परत-का-क्षरण
ओजोन परत का क्षरण
  • सीएफसी, हैलोजन्स, नाइट्रस ऑक्साइड ट्राइक्लोरोएथिलीन, हैलोन-1211, 1301 इत्यादि गैसें ओजोन परत को क्षीण करने के लिए उत्तरदायी हैं। 
  • वायुमंडल में उपस्थित ओजोन के क्षरण का क्लोरोफ्लोरोकार्बन एक प्रमुख कारण है। वायुमंडल के ध्रुवीय भागों में ओजोन का निर्माण धीमी गति से होता है। अत: ओजोन के क्षरण का प्रभाव सर्वाधिक ध्रुवों के ऊपर देखने को मिलता है। 
  • ध्रुवीय समतापमंडलीय बादलों में उपस्थित नाइट्रिक अम्ल, क्लोरोफ्लोरोकार्बन से अभिक्रिया कर क्लोरीन का निर्माण करता है, जो कि ओजोन परत के प्रकाश रासायनिक विनाश के लिए उत्तरदायी है। चूंकि ध्रुवीय समतापमंडलीय बादल ऐसा माध्यम है, जहां क्लोरीन यौगिक ओजोन परत का विनाश करने वाले क्लोरीन कणों में परिवर्तित हो जाते हैं। अत: ओजोन परत में छिद्र का निर्माण करने में इनकी उपस्थिति आवश्यक है। 

ओजोन परत क्षरण के प्रभाव 

ओजोन परत क्षरण के पृथ्वी पर बहुत व्यापक प्रभाव पड़ते हैं। सूर्य से आने वाले हानिकारक पराबैंगनी विकिरण से त्वचा कैंसर होने का खतरा रहता है। अधिक समय तक सूर्य के पराबैंगनी विकिरण के शरीर पर पड़ने पर डीएनए में आनुवांशिक उत्परिवर्तन हो सकता है, जो त्वचा कैंसर का कारण बन सकता है।

सूर्य की पराबैंगनी किरणों को सामान्यतयः तीन वर्गों में बांटा जाता है। 

1)UV-A

2)UV-B

3)UV-C

UV-A तथा UV-B किरणों का त्वचा पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। UV-C भी अत्यंत घातक होती है, परंतु पृथ्वी सतह तक नहीं पहुंच पाती है। 

UV-B किरणों से जीवधारियों पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ते हैं। 

1) जीन उत्परिवर्तन 

2) पौधों की वृद्धि में रुकावट 

3) आनुवंशिक दोष 

4) मोतियाबिंद 

5) पत्तियों को क्षति  

6) सनबर्न 

7) प्रतिरक्षा तंत्र का कमजोर होना 

ओजोन परत सूर्य के उच्च आवृत्ति के पराबैंगनी प्रकाश की 93-99 प्रतिशत मात्रा अवशोषित कर लेती है, जो पृथ्वी पर जीवन के लिए हानिकारक है। यदि यह न हो तो  पृथ्वी पर सूर्य की पराबैंगनी किरणों से जैविक जीवन को अत्यधिक क्षति पहुंचेगी। परंतु यदि ओजोन को मात्र गैस के संदर्भ में लें, तो यह विषैली होने के कारण पृथ्वी की सतह पर जैविक जीवन के लिए हानिकारक है। 

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Sneha Katiyar

My name is Sneha Katiyar. I am a student. I like reading books

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