पौधों में प्रजनन || Reproduction in Plants in Hindi

पौधों में प्रजनन (Reproduction in Plants)

प्रत्येक सजीव प्रजनन क्रिया के माध्यम से ही सदृश्य जीव उत्पन्न कर पाते है। इस क्रिया के द्वारा ही वे अपने वंश को बनाये रखते हैं। पौधों में प्रजनन (Reproduction in plants) की विधियों को 2 श्रेणी में बाँट सकते हैं -लैंगिक तथा अलैंगिक जनन। लैंगिक और अलैंगिक जनन के अन्तर को निम्न रूप से समझ सकते हैं। 

पौधों के लैंगिक तथा अलैंगिक प्रजनन में अंतर (Difference Between Sexual and Asexual Reproduction in plants) 

लैंगिक प्रजनन अलैंगिक प्रजनन
इसमें दो जनक भाग लेते हैं। इसमें केवल एक ही जनक भाग लेता है।
इस जनन में अर्धसूत्री विभाजन द्वारा अगुणित युग्मक बनते हैं। यह जनन केवल असूत्री या समसूत्री विभाजन द्वारा होता है।
अगुणित युग्मक नहीं बनते हैं।
अगुणित युग्मक के मिलन से द्विगुणित युग्मनज बनता है। युग्मनज नहीं बनता है।
युग्मनज से नये जीव का विकास होता है। पैतृक कोशिकाओं से नये जीव का विकास होता है।
केवल बीज वाले पौधों में ही लैंगिक जनन होता है। बिना बीज वाले पौधों जैसे- गुलाब, अंगूर तथा केले में अलैंगिक जनन द्वारा जनन संभव है।
इस विधि द्वारा जनन में अधिक समय लगता है। इस विधि द्वारा जनन में कम समय लगता है।
संतति पौधे में नर व मादा दोनों जीवों के लक्षण पाये जाते हैं। अतः संतति पौधे नर व मादा दोनों से ही थोड़े भिन्न होते हैं। संतति पौधों की जीनी सरंचना मादा जीवों के एकदम समान होती है।
विभिन्नताओं के एकत्र होने से नये लक्षणों वाले पौधों का विकास होता है। नई किस्में विकसित नहीं हो सकतीं।

पौधों में अलैंगिक प्रजनन (Asexual Reproduction in plants) 

अलैंगिक प्रजनन ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें नया पौधा एकल जनक से बनता है और इसमें युग्मक या जनन कोशिकाओं की कोई भूमिका नहीं होती। पादपों में अलैंगिक जनन (Asexual Reproduction in plants) की निम्नलिखित विधियाँ पायी जाती हैं

1) विखण्डन (Fission)

यह एककोशिकीय पौधों में पाया जाता है। इसमें कोशिका सूत्री या असूत्री विभाजन द्वारा दो या अधिक कोशिकाओं में बँट जाती है। और संतति कोशिकाएँ नया पौधा बनाती हैं। 

2) कलिकोत्पादन (Budding)

यीस्ट कोशिका से छोटे कलिका-सदृश उभार या मुकुल बनते हैं जो कोशिका से अलग होकर नई यीस्ट कोशिकाएँ बनाते हैं। यीस्ट में ये कलिकाएँ मातृ कोशिका से अलग हुए बिना नए मुकुल या कलिका बना लेती हैं, जिससे एक ही यीस्ट कोशिका पर मुकुलों (कलिकाओं) की श्रृंखला बन जाती है। 

3) खण्डन (Fragmentation)

सरल संरचना वाले बहुकोशिकीय पादपों जैसे स्पाइरोगाइरा का फिलामेन्ट छोटे-छोटे टुकड़ों में टूट जाता है और प्रत्येक खण्ड नए तन्तु में विकसित हो जाता है। 

4) बीजाणु निर्माण (Spore Formation)

बीजाणु (Spore) का निर्माण एक कोशिकीय और बहुकोशिकीय, दोनों ही प्रकार के जीवों में होता है। यह प्रक्रिया पौधों में होती है।  बीजाणु निर्माण में, जनक पौधा अपने बीजाणु पेटी में सैकड़ों प्रजनन इकाईयाँ पैदा करता है, जिन्हें ‘बीजाणु‘ कहते हैं। जब पौधों की यह बीजाणु पेटी फटती है, तो ये बीजाणु हवा, जमीन भोजन या मिट्टी पर बिखर जाते हैं। यहीं ये उगते हैं और नए पौधे को जन्म देते हैं। राइजोपस (Rhizopus), म्यूकर (Mucor) आदि कवक बीजाणु निर्माण के उदाहरण हैं। यह सामान्य ब्रेड मोल्ड प्लांट (Common Bread Mould Plant) या राइजोपस कवक है यह बीजाणु निर्माण के  जरिए प्रजनन करता है।

5) कायिक प्रवर्धन (Vegetative Reproduction)

अधिकांश पादपों में जड़ें, तने, टहनियाँ और पत्ते होते हैं। ये सब कायिक अंग (Vegetative Part) कहलाते हैं। फूल, फल, बीज. आदि जनन अंग (Reproductive Part) कहलाते हैं। जब पौधे अपने कायिक अंगों (Vegetative Part) से नए पौधों को जन्म देते हैं तो इसे अलैंगिक प्रजनन कहा जाता है।  इसके कुछ उदाहरण हम सब जानते ही हैं, गुलाब की कटी हुई टहनी से नया पौधा उगना, आलू से नए पौधे का उगना, ब्रायोफाइलम की पत्तियों से प्रजनन, यीस्ट (ब्रेड बनाने में प्रयुक्त होने वाली) में मुकुलन, स्पाइरोगाइरा में खंडन आदि। 

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कायिक प्रवर्धन

 उदारहण-पुरानी सूखी घास के तने से नयी घास उगाई जाती है। अदरक, आलू शकरकंद आदि का एक छोटा टुकड़ा रोपने पर नया पौधा उगता है। अनेक पौधे, जैसे-अदरक, गन्ना, गुलाब, आलू चमेली, पुदीना तथा हल्दी को वनस्पतिक अथवा कायिक प्रवर्धन द्वारा उगाया जाता है। 

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पौधों में लैंगिक प्रजनन (Sexual Reproduction in plants) 

जनक पौधों द्वारा अपनी युग्मकों (Gametes) का प्रयोग कर नए पौधे को जन्म देने की क्रिया लैंगिक प्रजनन कहलाती है। पादपों या पौधों मे भी नर और मादा जनन अंग होते हैं। पौधों के ये जनन अंग पुष्पों और फलों के भीतर पाए जाने वाले बीजों मे पाए जाते हैं। ऐसे पौधों को आवृत्तबीजी (Angiosperms) या ‘पुष्पीय पौधे’ कहते हैं क्योंकि ये लैंगिक प्रजनन पद्धति द्वारा प्रजनन करते हैं। ज्यादातर पौधों के फूलों में ही  नर और मादा प्रजनन अंग होते है। एक ही पुष्प में नर और मादा प्रजनन अंग होते हैं। ऐसे पुष्प नर और मादा युग्मक बनाकर निषेचन को सुनिश्चित करते हैं, ताकि पौधे के प्रजनन (Reproduction in plants) के लिए नए बीज तैयार हो सकें। 

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पुष्प में लैंगिक प्रजनन

पुष्प में लैंगिक प्रजनन के चरण 

1) पुष्प का नर अंग पुंकेसर (Stamen) कहलाता है।  यह पौधे के नर युग्मकों के बनने में मदद करता है और परागकणों (Pollen Grains) में पाया जाता है।

2) पुष्प का मादा अंग अंडप/कार्पेल (Carpel) कहलाता है। यह पौधे के मादा युग्मकों या अण्ड कोशिकाओं को बनाने में मदद करता है और बीजाण्ड (Ovules) में पाया जाता है। 

3) नर युग्मक मादा युग्मक से निषेचन करता है। 

4) निषेचित अण्ड कोशिकाएँ बीजाण्ड (Ovules) में विकसित होती हैं और बीज बन जाती हैं। 

5) अंकुरित होने पर ये बीज ही नए पौधे बनते हैं। 

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Sneha Katiyar

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