Soil Erosion in Hindi || मृदा अपरदन कारण सरंक्षण, उपाय

मृदा अपरदन क्या है? (What is Soil Erosion?)

मृदा को ऊपरी या अन्य परत का हटना मृदा का कटाव (अपरदन) कहलाता है। यह वर्षा जल, तथा वायु आदि से होता है। इस प्रकार उपरी मृदा का एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्थानान्तरण मृदा अपरदन (Soil Erosion) कहलाता है। इस प्रक्रिया में मृदा की ऊपरी सतह में उपस्थित चिकनी मिट्टी, दोमट मिट्टी आदि की हानि होती है तथा मृदा में रेत, बजरी आदि शेष रह जाते हैं ।

इस प्रकार उपजाऊ भूमि बंजर भूमि में बदल जाती है । यद्यपि यह प्रक्रिया प्राकृतिक रूप से हवा तथा बहते हुए जल से होती रहती है किन्तु इन प्रक्रियाओं को बढ़ाने में अनेक मानवीय गतिविधियों का भी हाथ होता है। जैसा कि हम सभी जानते है कि जड़ों का एक कार्य मृदा को बाँधे रखना है। जहाँ घास, पेड़-पौधे आदि उगते हैं वहाँ पर हवा या बहते जल से मृदा पर विशेष प्रभाव नहीं पड़ता तथा भूमि बंजर होने से बच जाती है। 

इसके विपरीत वनों को साफ करने से मृदा की ऊपरी सतह ढीली पड़ जाती है तथा हवा व जल के साथ चली जाती है। वनस्पति न होने का नुकसान यह भी होता है कि वर्षा की बूंदे जमीन पर सीधे पड़ती हैं जिनकी गति अधिक होती है तथा इससे भूमि कटती है और मृदा का एक बड़ा उपजाऊ अंश पानी के साथ बह जाता है।  जमीन पर अत्यधिक चराई करने से भी भूमि आसानी से कटती है।  

मृदा अपरदन के कारण (Causes of Soil Erosion) 

मृदा अपरदन के अनेक कारण हैं जो इस प्रकार हैं

1) अत्यधिक चराई-

पशुओं द्वारा अधिक चराई से भी वनस्पति नष्ट हो जाती है जिसके कारण भूमि बंजर हो जाती है। बंजर भूमि अत्यधिक जल को रोक नहीं सकती है। अत: तेज हवाओं के द्वारा मृदा का अपरदन (Soil Erosion) हो जाता है। 

2) वनों में आग लगना-

प्राय: वनों में आग लगने से भी मृदा अपरदन होता है । इस स्थिति के कारण मृदा पर दो मुख्य कारकों (जल तथा वायु) का अत्यधिक प्रभाव पड़ता है जिसके कारण मृदा अपरदन (Soil Erosion) होता है। 

3) वनों की कटाई-

जनसंख्या वृद्धि के कारण कृषि के  लिए इमारतों के निर्माण, सड़क, बाँध और कारखाने बनाने के लिए भूमि की आवश्यकता होती है। अतः इस आवश्यकता की पूर्ति के लिए वनों की कटाई की जाती है। वनों की कटाई (वनस्पति व पेड़ों की कटाई) से मृदा का पानी सूख जाता है। इस प्रकार वनों की कटाई से भूमि बंजर बन जाती है। 

भूमि का जल रिस नहीं पाता, जिसके कारण मृदा के कण बारिश के जल द्वारा बह जाते है। जल नदियों में अपने साथ मृदा के कणों को लाता है जो तलछट मिट्टी के साथ जम जाता है, जिसके कारण बाड़ आती है। 

4) कृषि के गलत तरीके-

मृदा अपरदन (Soil Erosion) का एक कारण कृषि करने की गलत विधियाँ है। खेत को ढीले तरीके से जोतने से उसकी प्राकृतिक बनावट नष्ट हो जाती है। सफलतापूर्वक खेती  करने के बाद खाद न डालने से मृदा क्षमता कम हो जाती है। 

अतः मिट्टी सूख जाती  है तथा वायु उसे अपने साथ बहा ले जाती है। ढलुवादार स्थानों पर इस प्रकार की मिट्टी का जल द्वारा कटाव होता है। एक ही प्रकार की फसल बार-बार व लगातार उगाने से मिट्टी की उपजाऊ क्षमता नष्ट हो जाती है । 

5) मानव-

प्राकृतिक क्रियाओं की अपेक्षा मनुष्य द्वारा मृदा अपरदन तीव्र गति से होता है। जैसे-पशुओं को चराना, खुदाई, ढलानों पर इमारतों का निर्माण, वृक्षों की कटाई, खेतों की जुताई आदि। 

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मृदा अपरदन रोकने के उपाय (Methods to Prevent Soil Erosion) 

मृदा अपरदन को रोकने के उपाय निम्नवत् हैं

1) अभियांत्रिकी उपाय (Mechanical Methods)-

वैज्ञानिक खेती करने के लिए निम्न अभियांत्रिकी उपाय अपनाने चाहिऐ

  •  भूमि को समतल बनाकर जल के वेग को कम किया जाए। 
  • अधिक लम्बाई वाले ढालू क्षेत्रों (Steep Fields) को छोटे-छोटे टुकड़ों में बाँटकर कम ढलान वाले खेत बनाए जाएं। 
  • छोटे बाँध (Anicuts) बनाकर जल को रोका जाए। 

2) शल्य वैज्ञानिक उपाय (Agronomic Methods)-

वैज्ञानिक खेती के शल्य वैज्ञानिक उपाय निम्नलिखित हैं

  • खेत के चारों तरफ मेढ़ लगायी जाए।
  • अधिक पशुचारण (Overgrazing) पर रोक लगाई जाए। 
  • मिश्रित खेती (Mixed Cropping) तथा पट्टीदार खेती (Strip Farming) की जाए। 
  • खेत के ढलान के प्रतिकूल जुताई (Anti Ploughing) की जाए। 
  • मृदा की उर्वरता में वृद्धि करने के लिए दाल वाली फसलें (Leguminous Crops) उगाई जाएं। 

3) वानिकी सम्बन्धी उपाय (Forestry Methods)-

वानिकी को प्रेरित करने के उपाय निम्न हैं 

  • मृदा की उर्वरता बनाए रखने हेतु फसलों को बदलकर बोया जाए। 
  •  मृदा के pH की जाँच क बाद उपयुक्त फसल को बोया जाए। 
  • फसल की आवश्यकतानुसार भूमि में नमी को बनाए रखा जाए। 
  • सम्भावित कटाव क्षेत्र (Possible Erosion fields) के आस-पास सघन झाड़ियों तथा घास की रोपाई की जाए।

मृदा का संरक्षण (Conservation of Soil) 

पृथ्वी का एक-चौथाई भाग ही भूमि है तथा केवल 2 प्रतिशत भाग ही कृषि योग्य है जिस पर विश्व की तीन-चौथाई आबादी खाद्य पदार्थों हेतु निर्भर है। अतएव सहज ही यह अनुमान लगाया जा सकता है कि विभिन्न फसलों के उत्पादन का आधार भू-भाग की मिट्टी है। अतः इसका गुणवान होना बहुत जरूरी है ।

अत: भुमि का संरक्षण तथा अधिक से अधिक उत्पादन करने के लिए उपाय किए जाने चाहिए । प्रकृति से मेल करना सीखने हेतु कृषि उत्पादन में वृद्धि की जा सकती है। जिसके उपाय निम्नवत् है

1)मिट्टी का कटाव रोकने के लिए अधिकाधिक वृक्षारोपण किया जाए ताकि कृषि उत्पादन को बढ़ाया जा सके। 

2) पर्वतीय ढालों (Mountain Steps) पर कृषि हेतु कन्टूर  पद्धति (Countour Methods) का उपयोग किया जाए। 

3) परिवर्तित कृषि को स्थाई कृषि  में बदला जाए। 

4) रासायनिक खादों व कीटनाशकों का न्यूनतम प्रयोग किया जाए। इनके स्थान पर जैविक खादों का प्रयोग उपयुक्त है।  

5) कृषि भूमि के आसपास प्रदूषणजनक उद्योगों को स्थापित न किया जाए। 

उपरोक्त उपाय अपनाकर मृदा का संरक्षण करने के साथ ही कृषि उत्पादन भी बढ़ाया जा सकता है तथा समाज को समुन्नत बनाया जा सकता है। 

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Sneha Katiyar

My name is Sneha Katiyar. I am a student. I like reading books

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