Solar Energy in Hindi || सोलर ऊर्जा, सोलर सेल,

सोलर ऊर्जा (Solar Energy)

पृथ्वी पर ऊर्जा का सबसे बड़ा व अच्छा स्रोत सूर्य है जो कि ऊर्जा को पृथ्वी पर विद्युत चुम्बकीय विकिरण के रूप में पहुँचाता है। पृथ्वी पर इस विकिरण ऊर्जा को अन्य रूपों में परिवर्तित किया जा सकता है सूर्य द्वारा उत्सर्जित प्रकाश का अध्ययन करने पर पता चलता है कि सूर्य का लगभग 70% द्रव्यमान हाइड्रोजन, 28% हीलियम तथा 29% अन्य भारी तत्वों से बना हुआ है।  सूर्य के अत्यधिक ऊर्जा का कारण नाभिकीय संलयन है। जिसमें हाइड्रोजन नाभिक संलयन अभिक्रिया करके  हीलियम नाभिक का निर्माण करते हैं। जिससे अत्यधिक सोलर ऊर्जा (Solar Energy) का उत्पादन होता है। 

सोलर ऊर्जा की विशेषताएं (Characteristics of Solar Energy)

सूर्य से सीधे प्राप्त होने वाली ऊर्जा में कई खास विशेषताएँ हैं जो इस स्रोत को आकर्षक बनाती है। सोलर ऊर्जा की निम्नलिखित विशेषताऐं हैं। 

1) सोलर ऊर्जा (Solar Energy) अत्यधिक विस्तारित, अप्रदूषणकारी तथा अक्षुण होती है। 

2) सम्पूर्ण भारतीय भूभाग पर 5000 लाख करोड़ किलोवाट घंटा प्रति वर्ग मीटर के बराबर सोलर ऊर्जा (Solar Energy) आती है जो कि विश्व की सम्पूर्ण विद्युत खपत से कई गुना अधिक है। 

3) साफ धूप वाले (बिना धुँध व बादल के) दिनों में प्रतिदिन का औसत सोलर-ऊर्जा (Solar Energy) का अनुपात 4 से 7 किलोवाट घंटा प्रति वर्ग मीटर तक होता है । 

4) भारत में, एक वर्ष में लगभग 250 से 300 दिन ऐसे होते हैं जब सूर्य की रोशनी पूरे दिन उपलब्ध रहती है। 

Solar-panel
सोलर पैनल

सोलर ऊर्जा की कमियाँ (Drawbacks of Solar Energy) 

सोलर ऊर्जा की निम्नलिखित कमियाँ हैं। 

1)सोलर ऊर्जा (Solar Energy) के द्वारा, व्यापक पैमाने पर बिजली निर्माण के लिए पैनलों पर भारी निवेश करना पड़ता है। 

2) विश्व के अनेक स्थानों पर सूर्य की रोशनी कम आती है, इसलिए वहाँ सोलर पैनल कारगर नहीं हैं। 

3) सोलर पैनल बरसात के मौसम में ज्यादा बिजली नहीं बना पाते। फिर भी विशेषज्ञों का मत है कि भविष्य में सोलर ऊर्जा का अधिकाधिक प्रयोग होगा। 

सोलर ऊर्जा के उपयोग (Uses of Solar Energy) 

सोलर ऊर्जा के अन्य उपयोग निम्नलिखित हैं। 

1)सोलर संचालित परिवहन (Solar Powered Transportation)-

फोटोवोल्टिक ऊर्जा का उपयोग करने का यह अच्छा तरीका है। सोलर ऊर्जा (Solar Energy) के उपयोग के रूप में सोलर शक्तियुक्त रेलगाडियाँ, सोलर ऊर्जा का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए पी.वी. ऊर्जा द्वारा संचालित परिवहन को नवीन प्रयास करना चाहिए। रेलमार्ग, सब वे (Sub-Way) बसों विमानों, कारों को सोलर द्वारा संचालित किया जा सकता है। 

2) सोलर तकनीकी (Solar Technology)

यह सोलर ऊर्जा का उपयोग करने का एक नया तरीका है। इलेक्ट्रानिक्स का उपयोग आज की दुनिया में एक सामान्य सोलर ऊर्जा (Solar Energy) उपयोग बन गया है। एंकर पावर पोर्ट (Anker’s Powerport) जैसे सोलर संचालित चार्जर से, सेलफोन से लेकर टेबलेट तक चार्ज किया जा सकता है। 

3) सोलर प्रकाश (Solar Light)-

सोलर ऊर्जा (Solar Energy) से संचालित सोलर ऊर्जा स्ट्रीट प्रकाश इसके उपयोग का सामान्य उदाहरण है। एल.ई.डी. (L.E.D) बल्ब के रूप में सोलर प्रकाश का उपयोग बहुत अधिक हो रहा है जिससे बिजली की खपत कम होती है। 

4) सोलर ताप (Solar Heat)-

तापीय ऊर्जा के लिए पी.वी. ऊर्जा का उपयोग किया जाता है। सोलर वॉटर हीटर तथा अंतरिक्ष हीटर पैनलों को स्थापित करके बड़े प्लांट लगाए जाते है। सोलर अन्तरिक्ष हीटर सूर्य के प्रकाश का दोहन करके इसे तरल या वायु के एक माध्यम के रूप में उपयोग करके  तापीय ऊर्जा में परिवर्तित करता है जबकि सोलर वाटर हीटर जल का उपयोग करके ताप का स्थानान्तरण करते हैं। 

सोलर ऊर्जा (Solar Energy) का उपयोग कई अन्य प्रकार से किया जा सकता है इसके लिए हमारे वैज्ञानिकों ने अनेक युक्तियाँ बनाई है जिसके द्वारा इसका उपयोग और भी आसान हो गया है। 

ये कुछ प्रमुख युक्तियाँ निम्नलिखित हैं  

1)सोलर कुकर (Solar Cooker) 

2)सोलर सेल (Solar Cell) 

3)सोलर जल ऊष्मक (Solar Water Heater) आदि। 

1)सोलर कुकर (Solar Cooker) 

सोलर कुकर एक ऐसा उपकरण है जिसका उपयोग सोलर ऊर्जा (Solar Energy) द्वारा भोजन पकाने में किया जाता है। यह एक बॉक्स की तरह होता है जो सामान्यतः लकड़ी का बना होता है। 

इसमें अन्दर से काले रंग से रंगी हुई एल्युमिनियम का  एक-एक बॉक्स लगाया जाता है तथा लकड़ी और बक्सों के बीच ऊष्मा रोधी पदार्थ जैसे काँच की रूई थर्माकोल आदि को भर दिया जाता है। जिससे बॉक्स के भीतर उत्पन्न ऊष्मा को यह पदार्थ बाहर न जाने दे और अन्दर गर्मी बनी रहे। 

काला रंग ऊष्मा का अच्छा अवशोषक होने के कारण एल्युमिनियम के बॉक्स को काला रंग दिया जाता है।  इस बॉक्स के ऊपर एक पारदर्शी काँच का मोटा ढक्कन लगा होता है। इससे सोलर विकिरण की छोटी तरंगदैर्ध्य अन्दर तो जा सकती है परन्तु वापस नहीं जाती है तथा कुकर के साथ एक दर्पण का भी उपयोग किया जाता है। इसे सूर्य की स्थिति के अनुसार सेट किया जाता है और प्रकाश का परावर्तन करके कुकर के भीतर भेजा जाता है क्योंकि यह दर्पण परावर्तक का कार्य करता है। 

इसमें प्रयुक्त बर्तनों का भी बाहरी आवरण काले रंग से पेन्ट कर दिया जाता है जिस प्रक्रिया के फलस्वरूप 3-4 घंटों में कुकर के भीतर का तापमान 125 डिग्री सेल्सियस पहुंच जाता है। यह प्रतिवर्ष 3-4 रसोई गैस सिलेण्डरों की बचत करता है इससे पर्यावरण पर किसी भी प्रकार का दुष्प्रभाव नहीं पड़ता है। इसकी धीमी प्रक्रिया के कारण इसमें पका खाना स्वादिष्ट एवं पौष्टिक होता है। 

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2) सोलर सेल (Solar Cell) 

सोलर सेल में प्रयुक्त P-N संधि में P सतह का क्षेत्रफल ज्यादा रखा जाता है।  जिस पर धात्विक फिंगर इलेक्ट्रॉड लगा होता है क्योंकि फोटॉन आपतन के लिए अधिक क्षेत्रफल चाहिए होता है। जब इस पर फोटॉन आयतित होता है तो सहसंयोजी बन्ध टूटने के कारण फोटो इलेक्ट्रॉन युग्म उत्पन्न होते हैं। 

इलेक्ट्रॉन N-टाइप  होल P-टाइप में प्रवेश करते हैं। इससे P-N टाइप अर्द्धचालक में विभव उत्पन्न हो जाता है। यह एक परिपथ का निर्माण करते हैं जिसमें धारा N से P-टाइप की तरफ आती है। इसमें सिलिकॉन तथा आर्सेनाइड का प्रयोग किया जाता है। 

इसके द्वारा सोलर प्रकाश को सीधे ही विद्युत ऊर्जा में बदला जाता है। पहला व्यापारिक सोलर सेल सन 1954 में बनाया गया था जो लगभग 1.0% सोलर ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित कर सकता था। अतः सोलर सेल का प्रयोग केल्क्युलेटर आदि में किया जाता है।  

3) सोलर जल ऊष्मक (Solar Water Heater)

सोलर जल ऊष्मक का प्रयोग सोलर ऊर्जा की सहायता से जल को गर्म करने में किया जाता है। सबसे छोटा सोलर जल तापक 100 लीटर प्रतिदिन की क्षमता का है जो 4-6 सदस्यों वाले परिवार के लिए पर्याप्त है। इस पर 15000 रूपये से 18000 रुपये तक की लागत आती है।  सोलर जल तापन प्रणाली 1500 यूनिट बिजली की बचत प्रतिवर्ष करती है। यह 15-20 वर्ष तक काम कर सकता है। 

इसमें एक ऊष्मारोधी बॉक्स होता है जो अन्दर से काला पेंट से पुता होता है। इसमें ताँबे की नली जो कि काले रंग से पुती होती है,  को कुण्डली के रूप में लगा दिया जाता है। ताँबे की विशिष्ट ऊष्मा कम तथा सुचालकता अच्छी होती है। इस प्रक्रिया से अवशोषण क्षमता से बढ़ोत्तरी होती है। इसमें संवहन तथा विकिरण द्वारा ऊष्मा को रोकने के लिए इसके ऊपर भी मोटे काँच का ढक्कन लगा दिया जाता है। 

ठण्डा जल पाइप के माध्यम से ताँबे की नली में जाता है जहाँ सोलर से प्राप्त ऊष्मा द्वारा जल गर्म हो जाता है।  जब जल गर्म हो जाता है तो इसका भार ठंडे पानी से कम हो जाता है। अत: गर्म जल हल्का होकर पाइप द्वारा कार्य हेतु उपलब्ध होता है। अनेक ठण्डे प्रदेशों में इसका उपयोग पानी को गर्म करने में किया जाता है । ऑस्ट्रेलिया में 60 से 95 % तथा अमेरिका के फ्लोरिडा में लगभग 50,000 से भी अधिक मकानों में इस विधि द्वारा पानी गर्म किया जाता है। 

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Sneha Katiyar

My name is Sneha Katiyar. I am a student. I like reading books

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