What is Protein || प्रोटीन क्या है? स्रोत, उपयोगिता, प्रभाव

प्रोटीन (Protein) 

प्रोटीन (Protein) शरीर की वृद्धि एवं विकास के साथ-साथ शरीर का निर्माण करने के लिए आवश्यक है। 

शिशु अथवा बाल्यावस्था में प्रोटीन (Protein) की मात्रा की अधिक आवश्यकता होती हे क्योंकि उस समय शारीरिक विकास तीव्र गति से होता है। 

प्रोटीन (Protein) शरीर के निर्माण, वृद्धि, तन्तुओं की क्षतिपूर्ति, हार्मोन का निर्माण आदि के लिए आवश्यक है।  प्रोटीन शारीरिक विकास एवं वृद्धि का आवश्यक तत्व है । प्रोटीन ग्रीक भाषा क ‘प्रोटीज’ शब्द से बना हुआ है जिसका अर्थ है-सर्वोत्तम भोज्य पदार्थ। 

व्यक्ति के शरीर में पानी एवं प्रोटीन (Protein) की मात्रा सबसे अधिक होती है । प्रोटीन शरीर के तन्तुओं में समाहित रहता है । इन तन्तुओं के अतिरिक्त रक्त, हार्मोन्स, हड्डियों तथा दाँतों में भी कुछ मात्रा में प्रोटीन होता है । 

प्रोटीन (Protein) का निर्माण अमीनो अम्ल के द्वारा होता है । ऑक्सीजन की उपस्थिति में प्रोटीन का ऑक्सीकरण होता है। वास्तव में प्रोटीन का हमारे शरीर के लिए विशेष महत्त्व होता है।  प्रोटीन हमारे शरीर को शक्ति प्रदान करता है।  

प्रोटीन का संगठन (Combination of Protein)

यह एक कार्बनिक यौगिक है। प्रोटीन में मुख्यता कार्बन, हाइड्रोजन, ऑक्सीजन और नाइट्रोजन आदि तत्व होते हैं। 

प्रोटीन में प्रमुख अवयवों की मात्रा

1)ऑक्सीजन-23 प्रतिशत

2) कार्बन-50 प्रतिशत 

3) हाइड्रोजन-7 प्रतिशत 

4) फॉस्फोरस-0.3 प्रतिशत 

5) नाइट्रोजन-16 प्रतिशत 

6) सल्फर-0.3 प्रतिशत 

प्रोटीन प्राप्ति के स्रोत  (Sources of protein Recovery) 

प्रोटीन प्राप्ति के स्रोत निम्नलिखित हैँ-

1)प्रोटीन पशु जगत तथा वनस्पति जगत् दोनों स्रोतों से प्राप्त होता है। 

2) प्राणि स्रोत से प्रोटीन दूध, अण्डा, मछली, माँस आदि से अत्यधिक मात्रा में प्राप्त होता है। 

3) वनस्पति जगत से सोयाबीन, मटर, दालों आदि से प्रोटीन की प्राप्ति होती है । 

4) इसके अतिरिक्त मूँगफली, गेहूँ धान तथा कुछ सब्जियों में भी प्रोटीन अच्छी मात्रा में पाया जाता है। 

प्रोटीन के कार्य एवं उपयोगिता (Work and Use of Proteins) 

प्रोटीन के प्रमुख कार्य एवं उसकी उपयोगिताओं को निम्नवत् बताया गया है’

1) शरीर की वृद्धि तथा विकास हेतु-

प्रोटीन का महत्त्वपूर्ण कार्य शरीर की वृद्धि एवं विकास करना है। यह भी शरीर को ऊर्जा प्रदान करके शरीर निर्माण का कार्य करता है। यह शरीर की कोशिकाओं की मरम्मत करता है तथा नई कोशिकाओं का निर्माण करता है।  प्रोटीन रक्त, हार्मोन तथा पाचक रसों का उत्पादन करता है। बाल्यावस्था, किशोरावस्था में शारीरिक वृद्धि एवं विकास सबसे अधिक होता है। इस समय शरीर को प्रोटीन (Protein) की सबसे अधिक आवश्यकता होती है । 

2) शारीरिक क्षतिपूर्ति तथा रख-रखाव हेतु-

हमारे शरीर की कोशिकाओं में निरन्तर यह क्रिया चलती रहती है। कोशिकाओं की टूटफूट को सुधारने हेतु प्रोटीन आवश्यक होता है।  शरीर निर्माण हेतु नवीन तन्तुओं के निर्माण एवं टूटी-फूटी कोशिकाओं की क्षतिपूर्ति हेतु प्रोटीन (Protein) सहायक होता है। किसी चोट, दुर्घटना आदि के  द्वारा यदि शरीर में कोई चोट लग जाए तो घावों या चोट की क्षतिपूर्ति हेतु प्रोटीन की आवश्यकता होती है।  

3) रोग निरोधक क्षमता उत्पन्न करना-

हमारा शरीर प्राय: किसी न किसी रोग से ग्रसित हो जाता है। इन रोगों से लड़ने की क्षमता प्रोटीन से प्राप्त होती है। यह क्षमता रोग प्रतिरोधक क्षमता कहलाती है जिसके द्वारा व्यक्ति विभिन्न रोगों से लड़ने की शक्ति प्राप्त करते हैं। प्रोटीन (Protein) शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता उत्पन्न करने तथा उसको बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं । 

4) ऊर्जा उत्पादन हेतु-

विभिन्न कार्यों हेतु शरीर को ऊर्जा की आवश्यकता होती है। शरीर को यह ऊर्जा प्रोटीन से प्राप्त होती है। एक ग्राम प्रोटीन से चार किलो कैलोरी ऊर्जा प्राप्त होती है। शरीर की वृद्धि एवं विकास में प्रोटीन (Protein) सहायक ही नहीं होती  बल्कि उससे ऊर्जा भी प्राप्त होती है । 

5) विमिन्न एन्जाइम एवं हाँर्मोंन्स का निर्माण-

शारीरिक क्रियाओं हेतु विभिन्न एन्जाइम एवं हॉर्मोन्स को आवश्यकता होती है। शरीर हेतु नाइट्रोजन युक्त यौगिकों के निर्माण में प्रोटीन (Protein) विशेष रूप से सहायक होता है। शरीर की पाचन क्रिया में सहायक विभिन्न एन्ज़ाइम का निर्माण प्रोटीन क द्वारा ही होता है। इसके  अतिरिक्त प्रोटीन विभिन्न रसों के निर्माण में सहायक होता है । 

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प्रोटीन की कमी का प्रभाव (Effect of deficiency of Protein) 

प्रोटीन की कमी से शरीर पर विपरीत प्रभाव पड़ता है।  प्रोटीन (Protein) की कमी का प्रभाव बच्चों एवं वयस्कों दोनों पर पड़ता है। प्रोटीन की कमी के  प्रभाव को हम निम्नलिखित प्रकार से देख सकते है

1) बच्चों पर प्रोटीन की कमी का प्रभाव-

प्रोटीन की कमी का प्रभाव सबसे अधिक बच्चों पर पड़ता है। बच्चों में प्रोटीन (Protein) की कमी से क्वाशियरकर नामक रोग हो जाता है। यह रोग हो जाने पर पूरे शरीर पर सूजन आ जाती है। बालक की त्वचा शुष्क एवं रूखी हो जाती है, भूख घटने लगती है, रोग प्रतिरोधक क्षमता घटने लगती है। बच्चे का यकृत बढ़ जाता है तथा पेट निकल आता है। 

2) वयस्कों पर प्रोटीन की कमी का प्रभाव-

प्रोटीन (Protein) की कमी का वयस्कों पर भी विशेष प्रभाव पड़ता है जिसके परिणामस्वरूप शरीर का भार कम होने लगता है। इसक साथ ही शरीर में रक्त की कमी होने लगती है। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता घटने लगती हैं।  परिणामस्वरूप पैरों और श्रीणी गुहा वाले भाग में सूजन आ जाती है तथा हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैं । 

प्रोटीन की कमी को दूर करने के उपाय (Remedies for Protein Deficiency) 

प्रोटीन (Protein) की कमी को दूर करने हेतु प्रोटीन युक्त खाद्य-पदार्थों का सेवन करना चाहिए।  प्रत्येक व्यक्ति को प्रोटीन (Protein) युक्त खाद्य-पदार्थों जैसे-माँस, अण्डा, दूध, मछली, सूखे मेवे आदि का सेवन करना चाहिए। ये प्रोटीन उत्पादक खाद्य-पदार्थ हैं। इसके अतिरिक्त प्रोटीन मुख्यत: सभी प्रकार की दालों तथा फलीदार सब्जियों में पाया जाता है। प्रोटीन (Protein) की कमी को दूर करने हेतु प्रतिदिन के आहार में प्रोटीन युक्त पदार्थों को अनिवार्य रूप से सम्मिलित करना चाहिए। 

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Sneha Katiyar

My name is Sneha Katiyar. I am a student. I like reading books

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